5:16 AM
Partik singh

12:22 AM
     

सोचिए क्या होता अगर वो शख्स अंग्रेजों के कहने पर गांधी जी को दे देता जहर


16 अप्रैल को किसानों का दुख सुनने जसौली-पट्टी जाने के क्रम में चंद्रहिया के समीप एक अंग्रेज दारोगा नोटिस लेकर गांधीजी के पास पहुंचा। उसमें अविलंब चंपारण छोड़ने का फरमान जारी किया गया था। पर, उन्होंने चंपारण नहीं छोड़ा और शासनादेश की अवज्ञा कर मोतिहारी आ गये। अगले दिन निषेधाज्ञा तोड़ने के उल्लंघन में तात्कालीन एसडीओ जार्ज चंदर की अदालत में 18 अप्रैल को हाजिर होने का आदेश मिला। करीब दो हजार लोगों के साथ बापू ने 18 अप्रैल को न्यायालय में हाजिर होकर ऐतिहासिक बयान दिये। तत्पश्चात एसडीओ ने गांधीजी को जेल भेज दिया। हालांकि 20 अप्रैल को ही उनपर दर्ज मुकदमे उठा लिये गये।
मुजफ्फरपुर। अंग्रेजों के जुल्म से जब चंपारण त्रस्त था तो पंडित राजकुमार शुक्ल के प्रयास से 15 अप्रैल 1917 अपराह्न् तीन बजे महात्मा गांधी पहली बार मोतिहारी पहुंचे थे। अगले दिन उन्होंने सत्याग्रह का जो बिगुल फूंका, वह चंपारण सत्याग्रह के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने गोरों के अत्याचार से निलहे किसानों को मुक्ति दिलाई और किसानों से जबरन नील की खेती कराने की प्रथा पर रोक लगी। चंपारण सत्याग्रह महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन का भारत भूमि पर पहला प्रयोग था।     .........................................................................................
                   ..............................................      प्रसिद्ध समाजसेवी पंडित राजकुमार शुक्ल ने 27 फरवरी 1917 को मोहनदास करमचंद गांधी को एक पत्र लिखा था। इसी पत्र ने आजादी की लड़ाई के पहले अहिंसक आंदोलन का बिगुल फूंका और चंपारण सत्याग्रह ने गांधी को महात्मा बना दिया।...................................
                    गांधीजी को जहर मिला हुआ दूध दिया था अंग्रेजों ने........................................
जेल में किसानों से मिलने के क्रम में अंग्रेजों ने रसोइया बत्तख मियां के माध्यम से दूध में जहर मिलाकर गांधीजी को मारने का प्रयास भी किया। पर, बत्तख मियां ने गांधीजी को इसकी जानकारी देकर उन्हें बचा लिया।
......29 नवंबर 1917 को पास हुआ था चंपारण एग्रेरियन बिल...............................//////
नील की खेती से मुक्ति व टैक्स कम करने के लिए गांधीजी ने एक आयोग बनाया। इसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद, रामनवमी बाबू और धरनीधर प्रसाद के साथ तुरकौलिया के ऐतिहासिक नीम के पेड़ के नीचे बैठकर गरीब किसानों का बयान दर्ज किया गया। 29 नवंबर 1917 को मि. मौड़ ने चंपारण एग्रेरियन बिल अंग्रेजी अदालत में पेश किया, जिसे अंग्रेजी हुकूमत ने स्वीकृत कर लिया। यह बिल तीन कठिया प्रथा हटाने एवं बेसी टैक्स को कम करने से संबंधित थी। बापू के चंपारण सत्याग्रह की यह पहली विजयी थी। इस विजयी के बाद निलहों के अत्याचार व अनाचार की चक्की में पिस रहे निदरेष-निरीह जनता को मुक्ति मिली और उन्हें संघर्ष का एक नया संस्कार मिला।
                                      
किसानों से 40 प्रकार का टैक्स वसूलते थे गोरे
चंपारण के किसानों पर अंग्रेज तरह-तरह से जुल्म ढाहते थे। करीब 40 प्रकार के टैक्स वसूल कर उनका लहू चूस लेते थे। वहीं प्रति एक बीघा जमीन पर तीन कट्ठा जमीन में नील की खेती करनी पड़ती थी। अतीत का वह काला अध्याय आज भी जब चंपारणवासियों के जेहन में है।

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16 अप्रैल 1917 को फूंका था चंपारण सत्याग्रह का बिगुल..............................
16 अप्रैल को किसानों का दुख सुनने जसौली-पट्टी जाने के क्रम में चंद्रहिया के समीप एक अंग्रेज दारोगा नोटिस लेकर गांधीजी के पास पहुंचा। उसमें अविलंब चंपारण छोड़ने का फरमान जारी किया गया था। पर, उन्होंने चंपारण नहीं छोड़ा और शासनादेश की अवज्ञा कर मोतिहारी आ गये। अगले दिन निषेधाज्ञा तोड़ने के उल्लंघन में तात्कालीन एसडीओ जार्ज चंदर की अदालत में 18 अप्रैल को हाजिर होने का आदेश मिला। करीब दो हजार लोगों के साथ बापू ने 18 अप्रैल को न्यायालय में हाजिर होकर ऐतिहासिक बयान दिये। तत्पश्चात एसडीओ ने गांधीजी को जेल भेज दिया। हालांकि 20 अप्रैल को ही उनपर दर्ज मुकदमे उठा लिये गये।
 

  
 

4:16 AM
प्यार करने वालो की किस्मत ख़राब होती   है  हर  वक़्त  इन्तहा  साथ  होती  है वक़्त  मिले  तो रिश्तो  की किताब खोल  कर देख लेना  दोस्तीं  हर  रिश्ते से  लाजवाब  होती है 
1:10 AM

बहते अश्को की ज़ुबान नही होती,

लफ़्ज़ों मे मोहब्बत बयां नही होती,

मिले जो प्यार तो कदर करना,

किस्मत हर कीसी पर मेहरबां नही होती.

अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,

हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।


उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,

अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।


छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,

फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।


उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,

यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।


वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,

खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।


रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,

अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।


तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,

कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।


हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,

अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।


मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,

हर किसी से रिश्ता बना कर रखना.


हर सागर के दो किनारे होते है,

कुछ लोग जान से भी प्यारे होते है,

ये ज़रूरी नहीं हर कोई पास हो,

क्योंकी जिंदगी में यादों के भी सहारे होते है !


दिलको हमसे चुराया आपने ,

दूर होकर भी अपना बनाया आपने,

कभी भूल नहीं पायेंगे हम आपको,

क्योंकि याद रखना भी तो सिखाया आपने.


याद करते है तुम्हे तनहाई में,

दिल डूबा है गमो की गहराई में,

हमें मत धुन्ड़ना दुनिया की भीड़ में,

हम मिलेंगे में तुम्हे तुम्हारी परछाई में.


मौत के बाद याद आ रहा है कोई,

मिट्ठी मेरी कबर से उठा रहा है कोई,

या खुदा दो पल की मोहल्लत और दे दे,

उदास मेरी कबर से जा रहा है कोई.


दर्द को दर्द से न देखो,

दर्द को भी दर्द होता है,

दर्द को ज़रूरत है दोस्त की,

आखिर दोस्त ही दर्द में हमदर्द होता

3:37 AM
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